लोकतंत्र ओ अगर समझना है तो उसमे विपक्ष की भूमिका को समझना जरूरी है l पक्ष –प्रतिपक्ष दो ही इस देश के जन समुदायों को रेप्रेजेंट करते है l भारत के परिप्रेक्ष्य में आज यदि देखा जाए तो यू पी ए का जन समर्थन काफी कम मिलने से वो अपना प्रभाव खो चुकी है , नतीजतन साताधारी पार्टी बेलगाम होकर देश को अपना राज पाट समझकर जनता के द्वारा जमा किये हुए टैक्स के पैसे का दुरूपयोग करने के साथ ही साथ , जनता के अपने विचारों को रखने व मांग करने की प्रवत्ति को बल और सत्ता के धौंस में आकर दबाया जा रहा है l

अनावश्यक अध्यादेश लेकर आना

सत्ता पर काबिज सरकार बहुत होने के कारण ही अनेक कानून जो की अध्यादेश के माध्यम से लाकर आई है , जबकि इनके लिए प्रस्ताव लाकर भी चर्चा संसद में की जा सकती थी लेकिन उसकी आवश्यकता को समझा ही नहीं गया क्योंकि तानाशाही सोंच और सत्ता को अपनी जागीर समझने वाले लोग , ना तो जनता की परवाह करते है और ना ही इस देश की , वो तो बस परवाह करते है कुछ बड़े बिज़नेसमैंन की l

आर्टिकल 19 A का हनन

लगातार बेरोजगारों , किसानों एवं छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय इन पर लाठियां बरसा कर इनको खामोश करने की ये तकनीक सरकार के काम करने का उदाहरण है l जिस देश के नागरिक अपने वैचारिक और बोलने की आज़ादी को लेकर इस संविधान के ऊपर गर्व करते थे , वो गर्व करने का अब मौका सत्ता पर बैठे नेता बिलकुल नहीं देते l समस्या सरकार के सामने रखना मतलब देशद्रोह माना जाने लगा है l बोलने की आज़ादी छीनी जा चुकी है , किसी को सरकार के विरुद्ध आवाज उठाने का कोई हक नहीं बनता , यही इस मौजूदा सरकार में देखा जा रहा है l

विपक्ष – लचर अवस्था में बेहाल

दरअसल विपक्ष के नेता भी अपने समय में कम घोटाले तो किये नहीं असल में यह सब एक ही थाली के चट्टे बट्टे है l ये दुनिया को दिखाने के लिए तो भाषण बाजी में एक दुसरे को कोसते है लेकिन अन्दर ही अन्दर ये सब एक ही है , इसलिए यही कारण है की सरकार किसी की भी हो लेकिन इनके अपने काम एक दुसरे के साथ चलते ही रहते है l विपक्ष ने थोडा सा अगर जनता की आवाज को उठाने का प्रयास भी किया तो सत्ता पर काबिज सरकार इन आई ए , सी बी आई जैसे तीर विपक्ष की तरफ छोड़ देती है , और विपक्ष के नेता चुप्पी साध लेते है l

हर पार्टी है भ्रष्टाचार में लिप्त

हर पार्टी का कोई ना कोई नेता या संगठन ऐसा नहीं है जिस पर भ्रस्थाचार के मुक़दमे ना दर्ज हो , तो गौरतलब है की चोर चोर मौसेरे भाई वाली कहानी ही यहाँ सार्थक होती दिखाई देती है l और यही कारण है सत्ता  में कोई भी रहे उनके उनके  काम तो चलते रहते है , आपस में मिल जुल कर देश को लूटने का कार्य इसी तरह से किया जाता है l

जनता को मुर्ख बनाने की कला

जनता को मुर्ख बनाना कोई बड़ी बात हमारे देश  में इसलिए नहीं है क्योंकि , लोग धर्म, जाती,क्लास में बनते हुए है , और हर पार्टी को ये पता होता है की किस जाती के लोग किस क्षेत्र में कितने है , पार्टी का टिकेट भी जातिगत जनसँख्या को देखकर ही दिया जाता है l लोगों का अगर दिमाग देश की मूलभूत समस्याओं में यदि जाने भी लगता है तो , सीमा सुरक्षा , आतंकवाद, हिन्दू मुस्लिम जैसे मुद्दे निकाल कर , मुख्य मुद्दे गायब कर दिए जाते है l

मतदाता को होना होगा सतर्क

इस जाल से और देख को बदहाली से बचने व बचाने में केवल मतदाता ही यदि अपने मतों का विवेक से इस्तेमाल करे तो इस तरह की स्थिति नहीं पैदा हो l याद रखे की प्रचंड बहुमत की सरकार एक निरंकुश शासक लेकर आती है l प्रश्न पूंछटे रहे क्योंकि अगर कुछ सालों तक ऐसा ही खामोश बैठे रहे तो आने वाली नस्लों को इस लोकतंत्र की खूबसूरती कभी पता नहीं चल पाएगी और आने वाले समय के साथ ही शुरुवात होगी हिटलर शाही की l

इस आर्टिकल में लिखे गए विचार लेखक के अपने है

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