कोरोना की वजह से देश भर के स्कूल बंद कर दिए गए थे , गौरतलब है की पिछले 18 महीनों से स्कूल बंद होने की वजह से पढ़ाई ठप्प है l हालाँकि सरकार के द्वारा ऑनलाइन क्लास चलाने का हवाला देकर छोड़ दिया गया l जमीनी हकीकत में ऑनलाइन पढाई क्कितना सफल रही है इसको बताने की आवश्यकता नहीं है , धरातल पर इसका कितना प्रभाव रहा है यह सभी जानते है l
इस पूरे कोरोना काल में बच्चों का जो नुक्सान हुआ है उसकी भरपाई कर पाना बहुत मुश्किल है l कोरोना की दूसरी लहर के बाद हालाँकि कुछ राज्यों में स्कूल खोलने की कवायद की गई है वही कुछ राज्य अब भी स्कूल खोलने को लेकर पक्ष में नहीं है l

कुछ राज्यों ने कक्षा 9वी से 12वी कक्षा के बच्चों को स्कूल में 50 प्रतिशत क्षमता के साथ बुलाने और शिक्षण करने की अनुमति दे चुके है l लेकिन आइसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव के अनुसार सीनियर क्लास के बच्चों से ज्यादा छोटी क्लास के बच्चों के लिए स्कूल खोलने को लेकर जोर दिया है l
सीरो सर्वे के आधार पार आया है बयान
आइसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने चौथे चरण के सीरो सर्वे में लगभग 68 प्रतिशत जनसँख्या के हर्ड इम्युनिटी का हवाला लेते हुए कहा है की बच्चों में इसका ज्यादा असर पड़ने वाला नहीं है l कोरोना से पहले भी बच्चों में संक्रमण बहुत कम देखा गया है l दरअसल कोरोना वायरस जिस एस प्रोटीन रिसेप्टर की मदद से श्री की कोशिकाओं में जुड़कर उसमे संक्रमण पैदा करता है वो बच्चों में बेहद कम होती है , और यही कारण है छोटे बच्चों में इसके संक्रमण होने की सम्भावना बेहद कम होती है l और यदि होता भी तो स्थिति गंभीर नहीं हो पाती है l

यूरोप और अन्य कुछ देशों मे स्कूल नहीं हुए है बंद

बहुत सारे यूरोपियन और स्कैंडिनेवियाई देशों में स्कूल कोरोना की प्रथम लहर से लेकर अब तक बंद नहीं किये गए , एवं शिक्षण कार्य निर्बाध रूप से चलता रहा है l और वहां पर बच्चों में संक्रमण नहीं हुआ , इसी को अधर मानकर भारत में प्राथमिक कक्षाओ के शिक्षण कार्य को शुरू करने की सलाह दी गई है l हालाँकि सभी शिक्षकों स्टाफ आदि को वैक्सीनेसन करना अनिवार्य करने की सलाह दी है l
कम या जिन जगहों पर संक्रमण नहीं है उन स्थानों के खोल दिए जाए स्कूल
यह कही से भी तर्क संगत नहीं है की यदि तमिलनाडु में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या अधिक है तो उत्तराखंड में शिक्षण कार्य ना किया जाए , राज्यों , जिलों की स्थिति के अनुसार जहाँ केस कम है या न के बराबर है ऐसे जगहों पर स्कूल खोल देने चाहिए , अपने पिछले बयान में भी एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने यही सलाह दी थी l
लेकिन इसको अमल में लाने के लिए पता नहीं क्यों सरकार तैयार नहीं है l
