भाजपा सरकार ने ओबी सी को 27 प्रतिशत और आर्थिक रूप से पिछड़े मतलब जनरल वर्ग में आने वाले लोगों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला उत्तप्रदेश विधानसभा के चुनाव को देखते हुए लेना , आने वाले विधान सभा चुनाव में अच्छा खासा लाभ भाजपा को उत्तरप्रदेश की राजनीती में देने वाली है l जैसे जैसे चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है वैसे वैसे भाजपा अन्य अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग आदि को अपनी तरफ जोड़ने का कार्य कर रही है l ऐसे में विपक्ष की परेशानियाँ निश्चित रूप से बढ़ने वाली है और इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के विधान सभा के चुनावों में देखने को मिल सकती है l

हालाँकि इस नीति का विरोध रोकने के लिए जिस तरह से सामान्य वर्ग में आरक्षण दिया गया है यह भी काफी कारगर साबित हो सकती है l वैसे तो यह फैसला देश के अन्य भागों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है लेकिन उत्तरप्रदेश में इस फैसले को अलग तरह से देखा जा रहा है l बता दें की उत्तरप्रदेश में पिछड़े वर्ग की आबादी 54 प्रतिशत के लगभग है और निर्णायक चुनाव के लिए पिछड़े व अन्य वर्गों के वोट बैंक को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है l हालाँकि विश्लेषकों को यह भी कहना है की पिछले 2017 के चुनाव में पिछड़े वर्ग का वोट भी भाजपा की तरफ बढ़ा था , खासकर ऐसे विधानसभा क्षेत्र से जहाँ से मुस्लिम उम्मेदवार समाजवादी पार्टी की तरफ से खड़े किये थे l अब ऐसे में भाजपा ने पिछड़े वार्ग को मेडिकल की सीटों में 27 प्रतिशत के आरक्षण देने की बात करके विरोधी पार्टियों की नींद ख़राब कर दी है l
