क्या है तालिबान संगठन

तालिबान असल में सुन्नी विचारधारा वाले कट्टर मुस्लिमों का एक आन्दोलन है जिसमे व कट्टरता के पक्षधर है l यह लोग जनतंत्र में विश्वास नहीं रखते है और पूरी तरह से शरिया कानून को लागू करना चाहते है l 1994 में यह आन्दोलन अफगानिस्तान के दक्षिणी भाग में पनपा और धीरे धीरे यह पूरे अफगानिस्तान में फ़ैल गया l

दरअसल इस कट्टरपंथी विचारधारा का जन्म भी पाकिस्तान में ही मना जाता है , 1990 में जब सोवियत सेना अफगानिस्तान छोड़ रही थी , उसी समय इन कट्टरपंथियों के दिमाग में कट्टरपंथी शासन करने की मंशा पैदा हुई l और इसी को लेकर उस समय के तत्कलीन कट्टरपंथी नेता मुल्ला उमर ने इस आन्दोलन को आगे बढाने का काम किया l हालाँकि बीच में कुछ समय तक इनका शासन रहा लेकिन इनके अत्याचारों से परेशान होकर जनता ने लोकतान्त्रिक सरकार को चुना l लेकिन अब एक बार फिर से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तेजी से तालिबान कब्जा करता चला जा रहा है l

तालिबान ने हाल में ही 75 प्रतिसत अफगानिस्तान के भूभाग पर कब्जे की बात कही है l  लगभग 418 जिलों पर कब्जा तालिबानियों का हो चुका है जो जो की बेहद खतरनाक स्थिति है l

दुसरे देशों के सभी दूतावास बंद करके सभी देशों ने अपने अपने प्रतिनिधियों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है l इधर भारत ने भी अपने कंधार स्थित दूतावास को बंद कर दिया है l और इस पर सुरक्षा व्यवस्था तैनात की है l काबुल दूतावास की स्थिति पर भारत अपनी नज़र बनाये हुए है और सुरक्षा व्यवस्था को लगाया गया है l बता दे की अगर स्थिति  में अगर सुधर नहीं आता है तो यह भारत के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है l क्योंकि अफगानिस्तान में भारत ने भारी भरकम निवेश किया है l

भारत का निवेश 

भारत ने तकरीबन 3 अरब डॉलर का निवेश अफगानिस्तान में किया है l जब 2001 में तालिबानी सरकार सत्ता से बहार हुई थी और लोकतान्त्रिक सरकार बनी थी तभी से भारत ने निवेश करना शुरू किया था l जिसमे , सरकारी भवन , स्पोर्ट्स स्टेडियम , सड़क , पुलों का निर्माण के साथ साथ वहां के क्षेत्रों में बिजली पहुँचाने में भारत ने निवेश किया l लगभग 500 से ज्यादा योजनाए बनाईगई जिसमे कुछ पूरी हो चुकी है और कुछ में अभी भी कार्य चल रहा है l जिसकी वजह से अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था में सुधर हुआ और तेजी आई है l

भारत के लिए चिंता का विषय

बता दे की 1996 से 2001 तक की तालिबानी शासन के समय में भारत के द्वारा निवेश से बनी हुई परियोजनाओं को नुकसान पहुँचाया गया था l बने हुए अस्पतालों तक को तहस नहस कर दिया गया था l बता दे की बहुत सारी परियोजनाए और प्रोजेक्ट अभी अधूरे है जिस पर अभी भी काम चल रहा है l अब अगर इस दशा में तालिबानी सत्ता  में आते है तो इसमें कोई शक नहीं की की ये सभी परियोजनाए प्रभावित नहीं होंगी l इस समय भारत के द्वारा दो अहम् परियोजनाए जिन पर काम चल रहा है वो है ईरान के चाबहार बंदरगाह से अफगानिस्तान के देलारम तक की सड़क परियोजना और दूसरी है काबुल को पेय जल उपलब्ध कराने वाली शहतूत डैम परियोजना l

चाबहार बंदरगाह परियोजना बहरत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है चाहे वो सुरक्षा की द्रष्टि से हो या , कूटनीतिक पहलु से l बता दे की इस परियोजना में सड़क की लम्बाई 218 किलोमीटर है जो निर्माण पूरा होने के बाद अफगानिस्तान  को चाबहार बंदरगाह से जोड़ेगी l

इसके अलावा भारत पहले ही सलमा डैम का निर्माण कर चुका है जिससे 42 मेगावाट बिजली बनती है और 75 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होती है.

अफगानिस्तान  में भारत की मदद से कई हॉस्पिटल बनाए गए. कई पावर ट्रांसमिशन स्टेशन, स्माल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स चलाए भी जा रहे हैं. और अब अगर यदि तालिबानी सत्ता में आते है तो यह सब परियोजनाए बंद हो सकती है , और भारत के द्वारा किये गए निवेश पर पानी फिर सकता है l

हालाँकि भारत शुरू से ही शांति का पक्षधर रहा है l साथ ही रूस के साथ वार्ता के भी अफगानिस्तान   में शांति बहाल करने को लेकर अपना पक्ष रखा है l

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